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स्व0मा0कालीचरन यादव जी (पूर्व शिक्षामंत्री उ0प्र0 सरकार)

संस्थापक,समता स्नाकोत्तर महाविद्यालय, सदात, गाजीपुर उ0प्र0,

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं आध्यात्मिक शिक्षाविद आकाशीय कालीचरण यादव जी रिक्वायरमेंट, अमेरीकी जिले की राजनीति एवं शिक्षा जगत के एक महान पुरोधा थे। उन्हें क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए 'शिक्षा का गांधी' और 'कर्मयोगी' जैसी को याद किया जाता है।

कालीचरण यादव जी का जीवन, राजनीतिक सफर और उनके योगदान की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

1. प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

  • जन्म: उनका जन्म 13 अप्रैल 1933 को मिर्जापूर जिले के सादात ब्लॉक के अंतर्गत 'मिर्जापुर' गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रामपति यादव और माता का नाम मुली देवी था।

  • व्यक्तित्व: बेहद गरीब और आर्थिक रूप से अस्थिर परिवार में पैदा होने के बावजूद उन्होंने कड़ा संघर्ष किया। वे बचपन से ही मेधा और अनुशासित प्रिय थे।

2. शिक्षा जगत में योगदान (एक शिक्षक और संस्थापक)

राजनीति में आने से पहले और बाद में भी उनका मुख्य फोकस शिक्षा पर ही है:

  • उन्होंने वर्ष 1953 में एक शिक्षक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत और क्षेत्र के कई स्कूलों में की।

  • ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए उन्होंने समता इंटर कॉलेज (1969) और समता पी.जी. कॉलेज, सादात (1978) की स्थापना।

3. राजनीतिक यात्रा और मंत्री पद

कालीचरण यादव जी समाजवादी  के प्रति समर्पित थे। वे क्रांतिकारी के महान समाजवादी नेता स्व. दलारसिंग भाई से प्रेरित होकर राजनीति में आए और डॉ. राममनोहर  को अपना आदर्श मानते थे।

  • विधायक: वे सादात विधानसभा क्षेत्र से दो बार निर्वाचित हुए। उन्होंने 1974 में 'भारतीय क्रांति दल' के टिकट पर पहली बार जीत दर्ज की थी। अपने जीवन के अंतिम दशकों में वे समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े रहे।

  • आपातकाल में जेल: वर्ष 1975 में देश में आपातकाल (आपातकाल) लागू होने के दौरान उन्होंने कड़ा विरोध किया, जिसके कारण उन्हें लगभग 17 महीने तक जेल में बंदी बना दिया गया था।

  • उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री: वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश में रामनरेश यादव के नेतृत्व में बनी जनता पार्टी की सरकार में वे कैबिनेट मंत्री बने। मंत्री रहते हुए उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पूर्वी उ0प्र0, में शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने और नए स्कूल-कॉलेजों को स्थापित करने में ऐतिहासिक योगदान दिया।

4. सादगी और सिद्धांतवादी जीवन

कालीचरण यादव जी को उनकी बेदाग विश्वसनीयता, सादगी और सिद्धांतों के लिए जाना जाता था। शिक्षा मंत्री जैसे रसूखदार पद पर रहने के बावजूद वे हमेशा अडंबर से दूर रह रहे हैं और आम जनता के लिए आसानी से सहज रह रहे हैं। उन्होंने जीवनभर अपनी राजनीतिक पत्रिका से कभी सहमति नहीं बनाई।