
प्रबन्धक
जिससे मनुष्य का जीवन सुव्यवस्थित होता है। शिक्षा प्राप्ति से ही व्यक्ति विभिन कर्तव्यों का पालन करने में सफल होता है। इससे उसके भीतर आत्म संयम, आत्म चिन्तन, आत्म-विश्वास, आत्म विश्लेषण विवेक भावना, न्याय प्रवृत्ति और आध्यात्मिक वृत्ति का उदय होता है। इसी उद्देश्य से अति पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राएं इण्टर कालेज से उत्तीर्ण होकर बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे थे, परन्तु महाविद्यालय की स्थापना से इलाके में राहत और आशा का संचार हुआ भगवान श्रीकृष्ण जी के नाम पर में इस महाविद्यालय का नाम कृष्णा रखा यदि मन में सच्चा विश्वास हो और नियत साफ हो तो छोटा से छोटा व्यक्ति बड़ा से बड़ा कार्य कर सकता है। ऐत्ता हमने अपने जीवन में अनुभव किया। शिक्षा व्यक्ति को संस्कार बनाने की एक सतत् एवं गतिशील प्रक्रिया है जो वर्तमान एवं परम्परागत सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी में हस्तान्तरित करती है। इसी नियम का पालन करते हुए निर्माण से लेकर शिक्षण कार्य में अनेक योग्य, अनुभवी, कर्मठ, ईमानदार और भागीरथ प्रयत्न वाले लोग इस संस्थान से जुड़ते गये। अनुभवी लगनशील विद्वान एवं समर्पित तत्पर ऊर्जावान कर्मचारी इस पी० जी० कालेज के उत्तरोत्तर विकास में प्रयत्नशील हैं. इसके निर्माण संदर्भ में इलाके के तमाम शिक्षा प्रेमी मित्रों, सहयोगियों. अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ।